My City Essay In Hindi

शहरी जीवन पर निबन्ध | Essay on City Life in Hindi!

जो लोग गांवों में रहते हैं उन्हें शहरी जीवन अत्यधिक अरूचिकर लगता है । वहाँ का शोर-शराबा, धूल और धुँआ, भागदौड़ और अशांति उन्हें चका-चौंध कर देती है ।

वे लोग आराम से जीवन को व्याप्त करने के आदी होते हैं इसलिए वे ऐसा समझते है जैसे विदेश में आ गए हों । वहाँ के निरंतर शोर को वे सह नहीं सकते और बड़े तनाव की स्थिति में रहते है । परंतु शहर में जन्मे और वहीं पर पले व्यक्ति की स्थिति बिल्कुल भिन्न होती है ।

यह भीड़-भाड़ और लोगों की गहमा-गहमी उसको निरंतर शक्ति प्रदान करती है । इससे वह लोगो के संपर्क में आता है और उसमें मानवीय भाईचारे की भावना पैदा होती है । वह हमेशा उत्साहपूर्ण रहता है और इससे अच्छा अनुभव करता है । प्रत्येक दिन उसके सामने नई समस्याएं और उलझनें लाता हैं और उसे इनमें जल्दी से जल्दी तालमेल बिठाना होता है जिसके लिए उसे काफी परिश्रम करना पड़ता है ।

जीवन उसके लिए साहसपूर्ण, नवीनता से परिपूर्ण और हर कदम पर अप्रत्याशित होता है । शहरी जीवन की अपनी ही एक विशेष पद्धति होती है । सवेरा होते ही फेरी लगाने वालों और मोटरगाड़ियों के भोंपुओं की आवाजें आने लगती है । जैसे-जैसे दिन चढ़ता जाता है यह शोर और हलचल बढ़ती ही जाती है ।

जब दोपहर होती है तो कुछ घंटो के लिए रिहायशी क्षेत्रों में कुछ शांति हो जाती है । दोपहर बाद यह शोर बढ़ने लगता है । बच्चे स्कूलों से आते हैं और जल्दी-जल्दी खाना खाकर खेलने के लिए मैदानों में चले जाते हैं । दफ्तर के बाबू और कारखानों के मजदूर थके-मांदे और उदासीन घर को लौटते हैं, आराम से चाय-पानी पीते है और समूहों में बैठकर एक दूसरे से बातें करते और सुनते हैं ।

मोटर कारों के भोंपू एक बार फिर गलियों में गूँजते है । दुकानों पर स्त्री-पुरूषों की भीड़ खरीदारी के लिए इकट्‌ठा हो जाती है । सभी सिनेमाघरों में मनोरंजन के इच्छुक लोगों की भीड़ लग जाती है और फिर धीरे-धीरे यह तेजी घटती जाती है और रात्रि के अंधकार में समा जाती है ।

प्राय: लोग शहरों में रहना पसंद करते है । जॉनसन ने एक बार कहा था कि ” जब कोई व्यक्ति लंदन से ऊब जाता है तो वह जीवन से ही ऊब जाता है । ” यही बात सब शहरों के बारे में कही जा सकती है । शहरों के प्रति प्रेम के कई कारण है । शहरों में बहुत से लोगों को रोजगार मिलता है और इसीलिए वे शहरों की हानियों को भी सहन कर लेते है । शहरों में हजारों व्यवसाय हैं ।

वहाँ पर आधुनिक जीवन की सभी सुख-सुविधाएं मिलती है, जो हमारे गांव में उपलब्ध नहीं होती । शहरों मे हर प्रकृति और स्वभाव के लोगों के लिए स्थान है । यहाँ पर नीरसता और उदासीनता की भावना कभी भी उत्पन्न नहीं होती । इन सभी कारणों से जो लोग शहरों को अच्छा नहीं समझते वे भी शहरों की ओर खिंचे आते हैं ।

नगर वास्तव में उन लोगों के लिए विश्वविद्यालय होते हैं जो अनुभव और अवलोकन से कुछ सीखना चाहते हैं । किसी ने ठीक ही कहा है कि ”यदि आप चाहते हैं कि आपको सभी जाने और आप कुछ न जाने तो गांव में रहें, परन्तु यदि जानना चाहते हैं और आपको कोई न जाने, तो शहर में रहो ।”

प्रस्तावना: - बेशक हमने एक साल में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व खूब काम किया हो । चाहे मामला पर्यावरण-पहाड़ बचाने का हो या समाज में जागरुकता लाने का, भ्रष्टाचार पर नकेल कसने का हो या पीड़ितों को राहत पहुंचाने का। हमारे-आपके साझा पहल -प्रयास रंग लाए और हमें अच्छे नतीजे मिले। लेकिन, सुधार एक सतत प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के बीच आने वाली चुनौतियों से निपटने और सुधार जारी रखने के लिए पहल-प्रयास भी लगातार होन चाहिए। इसी सोच के साथ हमें अपने शहर को स्मार्ट बनाने में तेजी से काम करना होगा। इसके लिए जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर हम सबको कार्य करना होगा।

आधारभूत सुविधाएं एवं चुनौतियां: - यह निम्न हैं-

  • शुद्ध और पूरा पानी- जिले को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए कई कार्यों की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी योजनाओं को मूर्त रूप देना होगा। शहर में स्मार्ट सिटी और अमृत योजना के साथ ही पहले से निर्धारित कार्यो को दूरदर्शिता के साथ करवाना होगा। गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था पूरे शहर में चरमराई हुई है। कई आवासीय क्षेत्र ऐसे है जहां गंदे पानी की उचित निकासी नहीं होने से पानी सड़कों पर भरता है। वर्षाकाल में यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होते हैं। इसके लिए बड़े नाले बनाने, नव विकसित कालोनियों में भी नाले-नालियां बनाने की चुनौती रहेगी।
  • स्वच्छ भारत- स्वच्छ भारत अभियान के तहत 12 पंचायतों को ही खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा सका। अब फरवरी तक 85 ग्राम पंचायतों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 55 हजार शौचालयों का निर्माण होना है। नरेगा में श्रमिक संख्या को लेकर भी उदयपुर पिछड़ा है। आवास योजनाओं में लाभार्थी तक शत प्रतिशत राशि पहुंचाना भी चुनौती होगी।
  • बिजली- उपभोक्ताओं को गुणवत्ता पूर्ण बिजली देने के साथ ही शहर में बढ़ रहे लोड को व्यवस्थित करने की चुनौती मुंह बाये खड़ी है शहर में लगातार बढ़ रहे लोड फेंक्टर को देखते हुए जगह-जगह ट्रांसफामर लगाए जाने है, लेकिन इनकी जगह का चयन बड़ी चुनौती बना हुआ है। शहर की तंग गलियों को तारों के जंजाल से मुक्त करने के साथ ही अंडर ग्रांउड केबलिंग करने का कार्य भी हमारे लिए चुनौती से कम नहीं है।
  • मंडियां- सवीना स्थित शहर की सब्जी मंडी में चारों तरफ अव्यवस्था फैली हुई है लेकिन इसे सुधारने के लिए कोई कार्य नहीं किया जा रहा। हालांकि प्रशासन की ओर से कुछ कदम उठाकर कार्य करवाया गया लेकिन अब भी अव्यवस्थाओं का आलम है। मंडी में सफाई व्यवस्था रखने के लिए व्यापारियों को कचरा पात्र रखने के लिए कई बार बोला गया लेकिन अब तक व्यवस्था नहीं हुई। जिले की नवनिर्मित बलीचा मंडी परियोजना को जमीनी स्तर पर लाकर किसानों को फायदा देना होगा। यहां पर कृषि उपज मंडी अनाज व सब्जी मंडी, दोनों की जमीन स्वीकृत की गई है। कृषि उपज मंडी अनाज के पास पर्याप्त बजट होने के कारण वर्तमान में कार्य प्रगति पर है लेकिन सब्जी मंडी का कार्य रुका हुहा है। सब्जी मंडी के पास बजट न होने के कारण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया हैं। कृषि उपज मंडी (अनाज) के लिए मंडी में वन उपज मंडी यार्ड की स्थापना करना चुनौती है। इससे जिले के किसानों के लिए व्यापार के दरवाजे खुलेंगे। सरकार ने पिछले वर्ष प्रदेश में एक मात्र हमारे यहां विशिष्ठ मंडी बनाई थी। इसका कारण था कि जिले में वन उपज मंडी यार्ड की स्थापना होने से किसान अपनी वन उपज का अच्छा मूल्य प्राप्त कर सकेगा।
  • ट्रांसपोर्ट- सीवरेज, पार्किग सुविधा, पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे मुद्दों को लेकर पहले से जुड़ रहे उदयपुर शहर को स्मार्ट बनाना अभी हमारे समक्ष बड़ी चुनौती है। उदयपुर के लिए यह बड़े विकास का सपना है। स्मार्ट सिटी की सबसे बड़ी परियोजना के पहले चरण का आगाज होने के साथ ही सरकार प्रशासन और हम और आपके बीच में कई चुनौतियां भी खड़ी होगी। इसके लिए प्रशासन को तो चुस्त, इच्छाशक्ति से पूर्ण, दूरदर्शी होना ही होगा। साथ ही हम और आपको भी इस कार्य में पूरी सक्रयिता और सहभागिता निभानी होगी।
  • यातायात-शहर में बिगड़ी यातायात व्यवस्था के लिए सरकार के पास कोई प्लान नहीं है। वीडियो कोच बसों को बाहर किया गया लेकिन टेम्पों को बाहर करने में विरोध झेलना पड़ा। यातायात सुधार के लिए भी कोई मास्टर प्लान नहीं बना हैं। बैठकों में कई बार पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने सिर्फ कागजी कार्रवाई की। आज तक शहर में न तो प्लाईओवर बन पाया, न बड़े वाहन पूरी तरह शहर से बाहर हुए। लगातार घाटे में चल रहे राजस्थान रोडवेज के सामने कई चुनौतियां हैं। रोडवेज प्रशासन को खराब बसों के लिए समय पर स्पेयर पाट्‌र्स उपलब्ध नहीं हो रहे। प्रतिदिन खराब होती बसों को रूट पर लाने और राजस्व बढ़ाने के प्रयास करने होंगे। बसों में सीसी टीवी कैमरे, जीपीएस सिस्टम और अन्य उपकरण लगाकर छीजत रोकने के प्रयास करने होंगे। रेल विकास की राह में उदयपुर-अहमदाबाद आमान परिवर्तन के कार्य के साथ ही स्टेशन के विकास एवं गाड़ियों के फेरे बढ़ाने की बड़ी आवश्यकता है। ब्रॉडगेज का कार्य समय पर हो, सिटी स्टेशन पर 4 और 5 नंबर प्लेटफार्म का कार्य, सैकेंड एंट्री के कार्य को समय पर पूरा करना होगा। उदयपुर से बाहर जाने वाली गाड़ियों का समय बड़े स्टेशनों पर प्रमुख स्टेशनों के लिए उठने वाली गाड़ियों के अुनसार रखना होगा।
  • रोड नेटवर्क- उदयपुर में माली कॉलोनी से जैसी बोस हॉस्टल तक 100 फीट रोड बनाने, आरटीओ से सुविवि के मुख्य प्रवेशद्वार तक 80 फीट रोड का नेटवर्क विकसित करने की भी चुनौती रहेगी। स्वामीनगर वाली 100 फीट रोड को अस्तित्व में लाना खास उपलब्धि वाला होगा। देहलीगेट से शास्त्री सर्कल जाने वाले मार्ग पर आ रही एलआईसी की ईमारत को हटाकर मार्गाधिकार चौड़ा करने, फतहपुरा चौराहे का अटका विस्तार कार्य पूरा करने के लिए अदालतों से मामले उठाने की प्रभावी पैरवी करनी होगी। रूपसागर के पास अमरूदों की बाड़ी वाले स्थान पर प्रस्तावित तिराहा और उससे निकलने वाली तीन दिशाओं वाली 80 फीट सड़कें, दक्षिण विस्तार योजना में अहमदाबाद नेशनल हाइवे से सवीना हाइवे तक खोली गई नई 200 फीट सड़क का नेटवर्क बिछाने का काम बाकी है।
  • खेलकूद- महाराणा प्रताप खेल गांव में आरसीए के लिए क्रिकेट स्टेडियम निर्माण के लिए जमीन आवंटित की गई थी। आरसीए के आपसी विवाद के चलते स्टेडियम बनाने की दिशा में आज तक कोई कार्य नहीं हुआ। बेशकीमती जमीन व्यर्थ पड़ी है। खेल गांव समिति के लिए स्टेडियम निर्माण करना सबसे बड़ी चुनौती है। खेलगांव में हॉस्टल निर्माण की भी आवश्यकता है। स्टेडियम के अधूरे कार्य को पूरा करना व अतंराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना खेल जगत के लिए अति आवश्यक है।
  • शिक्षा विभाग- सुखाड़िया विवि में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की भारी कमी चुनौती के रूप में सामने है। ए-ग्रेड सुविवि में 50 फीसदी से ज्यादा पद रिक्त है। व्यवस्थाओं का संचालन अतिथि प्राध्यापक व संविदा कर्मियों के माध्यम से किया जा रहा है। महाराणा प्रताप कृषि व प्रौद्योगिकी विवि के शोध किसानों की आर्थिक दशा बदल सकते है। लेकिन, विवि के शोध कार्य कैंपस तक ही सिमट कर रह जाते हैं। शोध व तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाना विवि के समक्ष प्रमुख चुनौती है। विवि में प्रतिवर्ष होने वाले कृषि आधारित राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय सेमिनार व कांफ्रेस होते रहते है इस प्रकार के आयोजनों में किसानों को सम्मिलित करना होगा। टीएसपी क्षेत्र में शिक्षकों सहित सभी सरकारी कर्मचारियों को रोके रखने के लिए नियम बने लेकिन उन पर थोड़ भी ध्यान नहीं दिया गया। हाल ही चल रही शिक्षक भर्ती में इन नियमों की पालना करना भी एक बड़ी चुनौती है। आरटीई नियमों की पालना कराना शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। शिक्षा का अधिकर अधिनियम (आरटीई) केंद्र सरकार ने लागू तो कर दिया लेकिन इसकी पालना पूरी तरह नहीं हो रही है। इसके प्रावधानों के अुनसार स्कुलों मं न तो भवन हैं, न फर्नीचर। कई स्कूल तो किराए के भव में चल रहें हैं। और तो और, शिक्षकों की कमी तक दूर नहीं हो पा रही है। अब तक मात्र नि: शुल्क शिक्षा के नियम पर ही पूरा जोर है।
  • जेल- का स्थानांतरण का पूरा मुद्दा राजनीति की भेंट चढ़ गया। कई जगह जमीन देखने के बाद लकड़वास में 100 बीघा जमीन तय की लेकिन इसे असुरक्षित बताया गया। अब तक न तो नई जमीन तय हुई न लकड़वास के लिए कोई बजट मिला। वर्तमान में करीब 22 बीघा जमीन में स्थित उदयपुर केंद्रीय कारागृह में क्षमता से अधिक बंदी हैं।
  • अदालत- गृहमंत्री हमारे यहां से होने के बावजूद हम यहां हाईकोर्ट की मांग पुरजोर तरीके से नहीं रख पा रहे। आदिवासी अंचल के जरूरतमंद और अशिक्षित लोगों की जयपुर-जोधपुर की दौड़ खत्म करने के लिए 34 से यह आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाना होगा। अदालतों के नए भवन के लिए भी कार्य बाकी है।
  • क्राइम- जिला पुलिस के पास अपराधों पर काबू पाने की चुनौती है। आदिवासी बहुल इलाका होने से पुलिस के लिए मौताणा व भूमि दलाल सबसे बड़ी चुनौती हैं। मौताणों की कुप्रथा को लेकर शव को कई दिनों तक नहीं उठाने के विवाद लगातार सामने आ रहे हैं। इसके चलते कई बार चढ़ोतरे भी हुए। शहरी व उसके आसपास के इलाके में गरीबों की जमींनो पर भूमि दलालों की निगाहों से पनप रहे धोखाधड़ी के मामले सर्वाधिक हैं। इन मामलों में प्रभावी कार्रवाई की बजाए पुलिस ढिलाई बरत रही है।
  • पर्वत- शहर में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए यूआईटी को उसकी बनाई व्यवस्था के तहत 50 मीटर से छोटी और अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों के संरक्षण की दिशा में बहुत कुछ करना होगा। सरकार से राजस्व नियम और पहाड़ियों की लगातार कटाई रोककर उस पर निर्माण करने संबंधी कानून, उप विधियां आदि लागू कराने होंगे।
  • दक्षिण विस्तार योजना- बलीचा, दक्षिण विस्तार क्षेत्र की योजनाओं में निम्न तबके के परिवारों, कम आय वर्ग के लोगों को बसाने के लिए हजारों घरौंदों का आवंटन, उनका चयन करने के लिए लॉटरी आदि प्रक्रियाएं निपटाने की योजनाओं की आवश्यकता होगी। आवासहीन लोग पिछले सालभर में कई बड़े प्रदर्शन कर प्रशासन और सरकार का ध्यान इस और दिला चुके हैं।

पर्यटन व झीले: - राज्य सरकार लेक डवलपमेंट अथॉरिटी का कार्यालय अब तक स्थापित नहीं कर सकी है। उदयपुर की झीलों की सुरक्षा और विकास के लिए इस अथॉरिटी का कार्यालय स्थापित होना अत्यंत आवश्यक है। झीलों के संरक्षण सम्वर्द्धन की दिशा में प्राधिकरण की शक्तियों के जरिये काफी कुछ काम किया जा सकता है। इस पुराने लंबित काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए मजबूती से आगे बढ़ने की जरूरत है।

अब तक केवल फतहसागर को ही मुख्य पर्यटन केंद्रों में शुमार किया जाता है। यहां की तरह सुविधाएं व एडवेंचर अन्यत्र भी मिले तो लोगों को आकर्षित कर पाएगें बड़ी में तो मरीना चलाने के लिए इजाजत मिल गई है। अम्बेरी पचांयत में पुरोहितों का तालाब भी एक नए डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां छतरियां व पार्क विकसित कर दिए गए हैं। शहर में वॉटर स्पोट्‌र्स के तहत अब तक केवल फतहसागर पर ही स्पीड बोट व वॉटर स्कूटर्स का संचालन किया जा रहा है। काफी समय से बड़ी व जयसंमद पर इनके शुरू होने के प्रयास किए जा रहे थे जिसे लंबा समय हो गया है। वहीं, कई बार पर्यावरण प्रेमी इन एडवेंचर गतिविधियों को जलीय पंछियों को देखते हुए बंद कराने की मांग कर चुके हैं।

योजना: - महत्वाकांक्षी मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना के तहत अब तक 10 करोड़ रुपए की राशि का व्यय किया जा चुका है। पूर्व में इसके लिए केंद्र सरकार को संशोधित डीपीआर प्रेषित की गई थी। इसके लिए केंद्र सरकार ने 8 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी और अब हाल ही इसके लिए पर्यटन मंत्रालय से भी प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है इस महत्वाकांक्षी योजना को लगभग 10 वर्ष से भी अधिक हो चुके हैं लेकिन अब भी बहुत काम करने बाकी है। योजना के तहत पर्यटकों के लिए यहां कई आकर्षक जोड़े जाने हैं। जिन जगहों पर काम हुए थे, वहां भी सुरक्षा व देखरेख के अभाव में अब फिर से बदहाली का आलम देखा जा रहा है।

उपसंहार: - अभी हमें अपने उदयपुर सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए आगे ओर भी अधुरे कार्य करना बाकी है और नए कामों की शुरूआत भी बेहतर ढंग से करनी हैं। इस काम के लिए हम सब को एक जूट होकर ही करना पड़ेगा इसमें चाहे जनता हो, सरकार हो, प्रशासन हो कोई भी सबका संहयोग होने पर ही हम स्मार्ट सिटी बनाने में सफलता हासिल कर पायगें।

- Published/Last Modified on: January 11, 2016

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